भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन सिंह रावत की स्मृति में आज रक्षा मंत्रालय ने एक विशेष समारोह आयोजित किया, जहां उनकी चीन के साथ सीमा विवाद में निडर भूमिका को याद किया गया। 2020 के गलवान संघर्ष के दौरान पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जनरल रावत ने चीनी सेना की आक्रामकता का सीधे सामना किया। उन्होंने सैनिकों को प्रेरित करते हुए कहा था कि दुश्मन की आंखों में आंखें डालकर ही शांति सुनिश्चित की जा सकती है। यह समारोह उनकी शहादत की चौथी वर्षगांठ से ठीक पहले हो रहा है, जब 8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में वे शहीद हो गए।
जनरल रावत का सैन्य सफर 1978 में भारतीय सेना में कमीशन होने से शुरू हुआ, जब वे गोरखा राइफल्स में शामिल हुए। 40 वर्षों की सेवा में उन्होंने कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक कई अभियानों का नेतृत्व किया। 2019 में सीडीएस बनने के बाद उन्होंने तीनों सेनाओं के एकीकरण पर जोर दिया, जिससे रक्षा बजट का बेहतर उपयोग संभव हुआ। पूर्वी लद्दाख में तनाव के समय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में स्पष्ट चेतावनी दी कि चीन की विस्तारवादी नीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जनरल रावत की विरासत से भारतीय सेना अधिक मजबूत और एकजुट हुई है, जिसका असर वर्तमान सीमा तनावों में दिख रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समारोह में कहा कि उनकी नीतियां भविष्य की रणनीति का आधार बने रहेंगी। आने वाले वर्षों में थिएटर कमांड सिस्टम को पूरी तरह लागू करने से चीन जैसे पड़ोसियों के प्रति भारत की स्थिति और सशक्त होगी। यह समारोह न केवल उनकी बहादुरी को सम्मान देता है, बल्कि युवा सैनिकों को प्रेरित करता है
