मद्रास HC ने शराब पर क्यों किया गांधी का जिक्र? विरोधियों पर FIR रद्द

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में शराब के खिलाफ गांधीजी के उद्धरणों का हवाला देते हुए विरोध प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया। यह मामला तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के अलागंकुलम गांव का है, जहां ग्रामीणों ने स्थानीय TASMAC शराब दुकान के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध किया था। जस्टिस बी. पुगलेंद्ही की एकलपीठ ने 2 दिसंबर 2025 को यह फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि शराब के सेवन से परिवार और समाज बर्बाद होता है।

कोर्ट ने तमिल कवि तिरुवल्लुवर के ‘तिरुक्कुरल’ से उद्धृत करते हुए शराब के नुकसानों पर प्रकाश डाला। तिरुवल्लुवर ने कहा था, “शराब पीने वाला व्यक्ति जहर पीने जैसा है, जो खुद को और अपने लोगों को बर्बाद कर देता है।” इसके अलावा, महात्मा गांधी के शब्दों का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा, “शराब इंसान को खुद को भुला देती है और उसके प्रभाव में वह कुछ भी उपयोगी नहीं कर पाता। जो पीते हैं, वे खुद को और अपने अपनों को तबाह कर देते हैं।”

फरवरी 2025 में ग्रामीणों ने दुकान को आवासीय इलाके से हटाने की मांग की, क्योंकि यह महिलाओं और बच्चों को परेशान कर रही थी। पुलिस ने धारा 126(2), 189(2) आदि के तहत FIR दर्ज की, लेकिन कोर्ट ने इसे रद्द करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत संरक्षित है

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