अमेरिका में ‘नो किंग्स’ रैलियां: ट्रंप की तानाशाही के खिलाफ लाखों की ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन की तैयारी, पीली शर्ट पहनकर सड़कों पर उतरेंगे प्रदर्शनकारी

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वाशिंगटन डीसी, 18 अक्टूबर 2025  – अमेरिका में आज शनिवार को ‘नो किंग्स’ (No Kings) नामक राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कथित तानाशाही, भ्रष्टाचार और लोकतंत्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट आवाज बुलंद कर रहे हैं। जून 2025 में हुए पहले चरण के बाद यह दूसरा बड़ा आंदोलन है, जिसमें अनुमानित रूप से 50 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरेंगे। संगठकों का नारा है – ‘नो किंग्स, नो थ्रोन्स, नो क्राउन्स’ (कोई राजा नहीं, कोई गद्दी नहीं, कोई ताज नहीं)। प्रदर्शनकारियों से पीली शर्ट पहनने की अपील की गई है, जो पीले रंग को लोकतंत्र की रोशनी का प्रतीक मानते हैं।

आज सुबह से अमेरिका के 50 से अधिक राज्यों में 2,500 से ज्यादा स्थानों पर रैलियां शुरू हो चुकी हैं। लॉस एंजिल्स, न्यूयॉर्क, वाशिंगटन डीसी, जर्सी सिटी, डेनवर और दक्षिणी मैरीलैंड जैसे शहरों में भारी भीड़ जुट रही है। संगठकों के अनुसार, यह जून 14, 2025 को हुए ‘नो किंग्स डे’ से भी बड़ा होगा, जब ट्रंप के 79वें जन्मदिन और अमेरिकी सेना के 250वें स्थापना दिवस पर 25 लाख लोग सड़कों पर उतरे थे।

प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखने पर जोर दिया गया है। संगठक इंटरफेथ एलायंस, लीग ऑफ कंजर्वेशन वोटर्स (LCV) और अन्य नागरिक समूहों ने इसे ‘नो किंग्स II’ कैंपेन का हिस्सा बताया है। 14 अक्टूबर को एक ऑनलाइन वेबिनार भी आयोजित किया गया था, जिसमें धार्मिक नेताओं ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों की आलोचना की।

संगठकों का मुख्य उद्देश्य ट्रंप के ‘मंडेट’ (जनादेश) के दावे को चुनौती देना है। वे कहते हैं कि ट्रंप प्रशासन की नीतियां – जैसे ट्रांसजेंडर अधिकारों पर हमला, विदेश नीति में एकतरफा फैसले और भ्रष्टाचार – अमेरिकी लोकतंत्र को खतरे में डाल रही हैं। एक पूर्व पेंटागन अधिकारी ने चेतावनी दी है कि ट्रंप का एजेंडा लोकतंत्र के लिए खतरा है।

रैलियों में बर्नी सैंडर्स और क्रिस मर्फी जैसे प्रमुख डेमोक्रेट नेता भाषण देंगे। हालांकि, कुछ आलोचक एक कार्यकर्ता का जिक्र कर रहे हैं, जिसने हमास हमले का बचाव किया था और ट्रंप पर हमले की कोशिश को सराहा था। फिर भी, संगठक आशावादी हैं और कहते हैं कि यह प्रदर्शन ट्रंप की सत्ता को चुनौती देगा।

X पर एक पोस्ट में लिखा गया: “नॉन-वायलेंट डिसिप्लिन ही आज का नियम है। व्हाइट हाउस की हिंसक भाषा का जवाब हिंसा से नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा से दें।” एक अन्य यूजर ने कहा: “मैं जर्सी सिटी में रैली में शामिल हो रहा हूं। हमारा एकमात्र फोकस लोकतंत्र की रक्षा है।” समर्थक हास्य का सहारा ले रहे हैं, इसे ‘हमारा गुप्त हथियार’ बता रहे हैं।

विपक्षी पक्ष से प्रतिक्रिया आई है। कुछ मैगा समर्थक काउंटर-रैलियां आयोजित करने की बात कर रहे हैं, जबकि अन्य इसे ‘बच्चों का खेल’ बता रहे हैं। वाशिंगटन स्टेट जीओपी ने इसे जॉर्ज सोरोस द्वारा फंडेड बताया, लेकिन संगठक इसे खारिज कर रहे हैं।

प्रदर्शनों के मद्देनजर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। जून के प्रदर्शनों के दौरान कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन की आलोचना के बाद तनाव बढ़ा है। हाल ही में व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी द्वारा अमेरिकी नागरिकों को ‘हमास आतंकवादी’ कहने से विवाद बढ़ा है।

यह आंदोलन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही चल रहा है। जून में ट्रंप की सेना परेड के साथ टकराव हुआ था, जो ‘राजशाही जैसा’ बताया गया।  संगठक उम्मीद कर रहे हैं कि इससे रिपब्लिकन कांग्रेस सदस्य ट्रंप के खिलाफ बोलें और यहां तक कि महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो।

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