‘ममता बनर्जी की सरकार अवैध रोहिंग्या को वापस नहीं भेजना चाहती इसलिए…’

कोलकाता, 19 दिसंबर 2025: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी का कहना है कि राज्य सरकार अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर चुके रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमार वापस भेजने में जानबूझकर टालमटोल कर रही है। यह विवाद पिछले हफ्ते तब तेज हुआ जब बीजेपी शासित राज्यों से बंगाली मुसलमानों को बांग्लादेश सीमा पर धकेलने के प्रयासों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस ने हस्तक्षेप किया। विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता में एक रैली में दावा किया कि टीएमसी रोहिंग्या को फर्जी दस्तावेज देकर वोट बैंक बना रही है, जिससे राज्य की सुरक्षा खतरे में है

इस मुद्दे की पृष्ठभूमि में 2025 का बीजेपी का ‘अवैध प्रवासी निरोधक अभियान’ है, जिसमें असम, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से करीब 1,000 बंगाली भाषी लोगों को हिरासत में लेकर डिपोर्ट किया गया। ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) की जुलाई रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से कई भारतीय नागरिक थे, जिन्हें भाषा के आधार पर ‘रोहिंग्या’ या ‘बांग्लादेशी घुसपैठिए’ करार दिया गया। ममता बनर्जी ने 16 जुलाई को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “बंगाली बोलना अपराध नहीं है। हमारे प्रवासी मजदूरों को लक्षित करना भाषाई आतंकवाद है।” वहीं, बीजेपी राज्य अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बताया कि पार्टी ने चुनाव आयोग को 13 लाख संदिग्ध रोहिंग्या और बांग्लादेशी वोटरों की सूची सौंपी है।

इस विवाद से पश्चिम बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो गया है, जो 2026 विधानसभा चुनावों को प्रभावित कर सकता है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर डिपोर्टेशन प्रक्रिया पर रोक की मांग की है,

Scroll to Top