नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2025: पूरे उत्तर भारत में आज प्रदूषण ने विकराल रूप धारण कर लिया है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब समेत आधे देश के हिस्से में हवा में घुला जहर लोगों की सांसों को संकट में डाल रहा है, वहीं सड़कों पर ‘काले कोहरे’ ने यातायात को ठप कर दिया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 450 से ऊपर पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। सुबह से ही घना काला कोहरा छाया हुआ है, जो फसल अवशेष जलाने और औद्योगिक धुएं से उपजा है। लाखों लोग घरों में कैद हो गए हैं, जबकि स्कूल और कार्यालयों में अनिश्चितकालीन छुट्टी की घोषणा हो चुकी है। यह संकट पिछले हफ्ते से बढ़ रहा था, लेकिन आज यह चरम पर पहुंच गया।
इस प्रदूषण की जड़ें गहरी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में पराली जलाने की प्रथा, वाहनों का धुआं और फैक्टरियों से निकलने वाले कणों ने मिलकर यह हवा का जहर तैयार किया। पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 300 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक हो गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से 15 गुना ज्यादा है। पंजाब और हरियाणा में किसानों द्वारा 40 प्रतिशत से ज्यादा पराली अभी भी जलाई जा रही है, जिससे काला कोहरा (ब्लैक कार्बन फॉग) फैल रहा। डॉ. अनिता शर्मा, पर्यावरण विशेषज्ञ, ने कहा, “यह न केवल सांस की बीमारियां बढ़ाएगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन को भी तेज करेगा।”
