ईश्वर मनुष्यों को नुकसान नहीं पहुंचाते, अंधविश्वास vs आस्था पर कोर्ट की दो टूक

तमिलनाडु के एनोर जिले में एक घरेलू पूजा विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कहा कि न तो ईश्वर और न ही मूर्तियां मनुष्यों को कोई नुकसान पहुंचाती हैं। जस्टिस भरत चक्रवर्ती की एकलपीठ ने यह टिप्पणी एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान की, जो अप्रैल 2025 में दिए गए कोर्ट के आदेश के पालन न होने पर दायर हुई थी।

इस फैसले की पृष्ठभूमि में अंधविश्वास और सच्ची आस्था के बीच की महीन लकीर साफ नजर आती है। जस्टिस चक्रवर्ती ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘ईश्वर या मूर्तियां किसी को हानि नहीं पहुंचा सकतीं, ऐसी धारणाएं महज अंधविश्वास हैं, न कि भक्ति।’ कोर्ट ने अप्रैल 2025 के आदेश में मूर्तियां लौटाने, लाउडस्पीकर से शोर न करने और दान वसूली बंद करने के निर्देश दिए थे। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर साल सैकड़ों मामले अंधविश्वास से जुड़े अपराधों के कारण दर्ज होते हैं,

यह फैसला समाज पर गहरा प्रभाव डाल सकता है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां अंधविश्वास से निर्दोषों को नुकसान होता है। तमिलनाडु सरकार ने प्रतिक्रिया में कहा कि वह धार्मिक मामलों में सतर्कता बरतेगी और अंधविश्वास-रोधी अभियान तेज करेगी। भविष्य में ऐसे मामलों में कोर्ट की यह लाइन अन्य राज्यों के लिए मिसाल बनेगी, जिससे आस्था को बढ़ावा मिलेगा लेकिन अंधविश्वास पर अंकुश लगेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शिक्षा और जागरूकता के प्रयासों को बल मिलेगा, और धार्मिक स्वतंत्रता का सही अर्थ समझा जाएगा।

Scroll to Top