पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। मतदाता सूची को शुद्ध करने के नाम पर सामने आए आंकड़ों ने सबको हैरान कर दिया। स्थानीय चुनाव अधिकारियों की रिपोर्ट में दावा किया गया कि राज्य के 2,208 पोलिंग बूथों पर पिछले 20 वर्षों में एक भी मतदाता की मौत नहीं हुई। न कोई डुप्लीकेट वोटर, न स्थानांतरित नाम—यह ‘अमर वोटर्स’ का चमत्कार था, जो विज्ञान से परे लगता था। लेकिन क्या यह संभव था? बंगाल SIR मुर्दे मतदाता विवाद ने सवाल खड़े कर दिए कि कहीं फर्जी वोटिंग की साजिश तो नहीं रची जा रही?
चुनाव आयोग (EC) को यह आंकड़ा संदिग्ध लगा। तत्काल विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई और दोबारा सत्यापन का आदेश दिया। महज 24 घंटे के भीतर चमत्कार टूट गया—2,208 बूथों की संख्या घटकर मात्र 29 रह गई। दक्षिण 24 परगना जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां रायदिघी (66 बूथ), कुलपी (58 बूथ), पठारप्रतिमा (20 बूथ) और मगराहाट (15 बूथ) जैसे इलाकों में ‘जीरो डेथ’ का दावा किया गया था। EC के सूत्रों के अनुसार, पूरे राज्य में अब तक 21 लाख से अधिक मृत मतदाताओं की पहचान हो चुकी है,
राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए। बीजेपी ने ममता बनर्जी सरकार पर सुनियोजित साजिश का इल्जाम लगाया, कहा कि मृत नामों को जानबूझकर नहीं हटाया जाता ताकि चुनाव में फर्जी वोट डाले जा सकें। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने तंज कसा, “2,200+ बूथों पर जीरो मौतें—यह जादू तो सिर्फ बंगाल में ही हो सकता है।”
