फिर भेदभाव क्यों… शहीद अग्निवीर की

‘देश की सीमाओं पर जान गंवाने वाले शहीदों के परिवारों को सम्मान और लाभ मिलना चाहिए, लेकिन अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों के साथ भेदभाव क्यों? यह सवाल उठा है महाराष्ट्र के अग्निवीर मुरली नाइक की मां ज्योतिबाई नाइक ने। जम्मू-कश्मीर में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सीमा पार से हुई गोलाबारी में शहीद हुए उनके बेटे को नियमित सैनिकों जैसी सुविधाएं न मिलने पर उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।यह मामला न केवल एक परिवार का दर्द है, बल्कि पूरी अग्निपथ योजना पर सवाल खड़े कर रहा है।
मुरली नाइक, जो महज 21 वर्ष के थे, जून 2025 में जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में ड्यूटी पर थे। पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में वे शहीद हो गए। उनके परिवार को एक्स-ग्रेटिया और इंश्योरेंस के नाम पर करीब 1 करोड़ रुपये मिले, लेकिन परिवार पेंशन, आजीवन स्वास्थ्य सुविधा या सामाजिक सुरक्षा लाभ जैसे महत्वपूर्ण हक नहीं दिए गए।
अग्निपथ योजना, जो 2022 में शुरू हुई, युवाओं को चार साल की सेवा का मौका देती है, लेकिन शहीद होने पर लाभों में कमी के कारण विवादास्पद बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे युवाओं का मनोबल प्रभावित होता है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की तारीख तय कर दी है, जो 27 नवंबर को हो सकती है।
Scroll to Top