26/11 की वो गोली आज भी मेरे भीतर जिंदा है,

मुंबई के 26/11 आतंकी हमले की 17वीं बरसी पर, सबसे छोटी उत्तरजीवी देविका रोटावन ने अपनी जिंदगी का वो काला अध्याय फिर से साझा किया। मात्र नौ साल की उम्र में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर अजमल कसाब की गोली से घायल हुईं देविका आज 26 साल की हैं, लेकिन वो दर्द आज भी ताजा है। “17 साल बीत चुके हैं, लेकिन मेरे लिए वो रात अभी भी वैसी ही लगती है। गोली का घाव आज भी महसूस होता है,” उन्होंने कहा। ये कहानी न सिर्फ हिम्मत की मिसाल है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ न्याय की लड़ाई की भी।

26 नवंबर 2008 की वो भयानक रात। देविका अपने पिता और भाई के साथ पुणे जाने के लिए सीएसएमटी पहुंचीं। प्लेटफॉर्म 12 और 13 के बीच बैठे थे, जब अचानक धमाके की आवाजें गूंजीं। लोग इधर-उधर भागने लगे, खून से सनी लाशें बिखर गईं। देविका ने देखा, एक लंबा-चौड़ा हमलावर अंधाधुंध फायरिंग कर रहा था, जैसे मजे ले रहा हो। भागते हुए उनकी दाहिनी टांग में गोली लग गई। “मैंने सीधे उस बंदूकधारी को देखा था,” देविका ने याद किया। भाई वॉशरूम गया था, पिता टिकट लेने की सोच रहे थे,

देविका सबसे छोटी  गवाह बनकर  कोट  गयी और आरोपी को  पहचाना और  उसको  फांसी हो  गयी  पर  सरकार का किया वादा पूरा नहीं हुआ रिश्तेदारों  ने भी  उनसे दूरी बना ली

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