भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में गगनयान मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया। यह ‘इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट’ (IMAT) था, जो चालक दल वाले मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी साबित हुआ। 3 नवंबर 2025 को हुए इस परीक्षण ने इसरो के वैज्ञानिकों और देशवासियों में उत्साह भर दिया, क्योंकि गगनयान भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान है। सोशल मीडिया पर #GaganyaanTest और #ISROJhansi जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लोग इस सफलता की सराहना कर रहे हैं।
टेस्ट के दौरान, भारतीय वायुसेना के आईएल-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर 2.5 टन वजनी सिमुलेटेड क्रू मॉड्यूल को ड्रॉप किया गया। मुख्य पैराशूट सिस्टम ने मॉड्यूल को सुरक्षित उतारने में पूरी तरह सफलता दिखाई।इसरो के मुताबिक, यह परीक्षण पैराशूट की स्थिरता, डिप्लॉयमेंट और लैंडिंग स्पीड को वेरिफाई करने के लिए डिजाइन किया गया था। झांसी की बबीना रेंज को चुना गया क्योंकि यहां विशाल ओपन एरिया उपलब्ध है, जो रीयल-टाइम सिमुलेशन के लिए आदर्श है। यह तीसरा IMAT टेस्ट था, जो पहले के परीक्षणों की निरंतरता दर्शाता है।
गगनयान मिशन की सफलता के लिए यह टेस्ट बेहद अहम है, क्योंकि पैराशूट सिस्टम ही अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर सुरक्षित वापस लाएगा।2026 में लॉन्च होने वाले इस मिशन में तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्री लो अर्थ ऑर्बिट में जाएंगे। इस सफलता से इसरो का आत्मविश्वास बढ़ा है, और अब अगले चरण में क्रू मॉड्यूल इंटीग्रेशन टेस्ट पर फोकस होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे परीक्षण भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक पर निर्भर बनाएंगे
इससे लगता हे गगनयान कि रह आसान रहीं हैं अब लोग अगले अपडेट के लिए बेसब्री से रूके हुये हैं क्या यहां भारत का नया अंतरिक्ष यात्रा का नया तरीका होगा इसकी दुसरी अपडेट लोगो के दिलों मे एक नयी ख़ुशी नया इंतजार लाया हे लोग यहां जानने को बहुत उत्साहित हे
