स्मार्टफोन आज के जमाने में हमारे जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा हो गया है।, और हम ज्यादातर समय में फोन का इस्तेमाल करते रहते है इसका इतना ज्यादा इस्तेमाल करने से ये हमारे जिंदगी में स्ट्रेस को बढ़ावा देता है फोन का ज्यादा इस्तेमाल नींद की समस्या पैदा करता है, क्योंकि फोन की स्क्रीन से नीली रोशनी निकलती है और ये नीली रोशनी हमारे शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन को दबाती है,ये हार्मोन हमारे शरीर में अच्छी नींद का रोल अदा करता है ज्यादा फोन से हमरा स्लीप साइकल बिगड़ जाता है। इससे तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ता है।
हम सभी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती है इसका ज्यादा ईस्तेमाल से हम लोगों को देखते हैं और उनकी झूठी जिंदगी देखने से हम खुद की तुलना उनसे करने लगते है जिससे बिना वजह का स्ट्रेस होता है, जो हमें फाइनेंशियल प्रेशर तक ले जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि फोन की यह लत दिमाग पर वैसा ही असर डालती है जैसे कोई नशा हमारे शरीर को बर्बाद कर देता है
सोशल मीडिया की लत दिमाग को नुकसान पहुंचाती है, खासकर नींद और एंग्जायटी पर।, सोने से पहले घंटों स्क्रॉलिंग करने से नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है। दिमाग हाई-अलर्ट मोड में रहता है, जिससे नींद टूटती है और थकान बढ़ती है। लाइक-शेयर की चाहत डोपामाइन रिलीज करती है, लेकिन इससे मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और एंग्जायटी दोगुनी हो जाती है। दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखकर आत्मविश्वास कम होता है, जो डिप्रेशन का कारण बनता है। अध्ययनों से साबित है कि यह लत फोकस और याददाश्त को भी कमजोर कर देती है।
नोमोफोबिया, यानी फोन के बिना बेचैनी, बच्चों-बड़ों को शिकार बना रही है। फोन से दूर रहने पर घबराहट, तनाव और चिड़चिड़ापन होता है, जो मानसिक निर्भरता बढ़ाता है। नींद की कमी से सिरदर्द, पेट दर्द और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। औसतन 7 घंटे फोन पर बिताने से एंग्जायटी जैसी दिक्कतें बढ़ी हैं, खासकर कोविड के बाद। बच्चों में यह हिंसक व्यवहार पैदा कर सकता है, जबकि वयस्कों में सामाजिक अलगाव बढ़ता है।
इस लत से बचने के लिए सरल उपाय अपनाएं। एनडीटीवी हेल्थ सुझाता है कि फोन को दूर रखें, नोटिफिकेशन बंद करें और दिन में फिक्स समय पर ही चेक करें। सुबह उठते ही या सोने से पहले दूरी बनाएं। पसंदीदा काम जैसे किताब पढ़ना या पेंटिंग करें, ताकि मन भटके नहीं।
