विधवा की दोबारा शादी से क्‍या कटेगा अनुकंपा नौकरी का हक?

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केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें स्पष्ट किया गया कि विधवा की पुनर्विवाह अनुकंपा नौकरी के अधिकार को प्रभावित नहीं करता। यह निर्णय सामाजिक न्याय की दृष्टि से महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत है, खासकर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों के आश्रितों के लिए। न्यायमूर्ति एन. नागारेश की एकलपीठ ने 12 नवंबर 2025 को इस मामले में फैसला दिया, जो विधवाओं को आर्थिक स्वावलंबन का अवसर प्रदान करता है।

हाईकोर्ट ने तर्क दिया कि अनुकंपा नियुक्ति एक वैधानिक अधिकार है, न कि प्रशासनिक दया। नियम 51बी के तहत मृतक शिक्षक के आश्रितों को नौकरी का हक मृत्यु के समय की निर्भरता पर आधारित होता है, न कि बाद की घटनाओं पर। पुनर्विवाह को अयोग्यता का आधार मानना न्याय का मजाक होगा, क्योंकि यह महिलाओं को जीवन पुनर्निर्माण से रोकता है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के श्रिजीथ बनाम डिप्टी डायरेक्टर (एजुकेशन) फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि आवेदन का प्रारूप सख्ती से लागू नहीं होता। साथ ही, सरकारी सर्कुलर जीओ(पी) नंबर 12/2023 को भी खारिज किया, जो पुनर्विवाहित विधवाओं को अयोग्य ठहराता था।

यह फैसला न केवल केरल तक सीमित है, बल्कि पूरे देश में अनुकंपा नियुक्ति नीतियों पर असर डालेगा। केंद्र सरकार के डीओपीटी आदेश के अनुसार भी, अनुकंपा आधार पर नियुक्त विधवा पुनर्विवाह के बाद सेवा जारी रख सकती है। इससे विधवाओं को सामाजिक कलंक से मुक्ति मिलेगी और परिवारों को आर्थिक सहारा।

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