भूटान की राजधानी थिंपू में 12 नवंबर 2025 को एक ऐतिहासिक आयोजन हुआ, जहां भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के साथ मिलकर कालचक्र अभिषेक का उद्घाटन किया। भारत रवाना होने से ठीक पहले पीएम मोदी इस पवित्र बौद्ध अनुष्ठान में शामिल हुए, जो ग्लोबल पीस प्रेयर फेस्टिवल का हिस्सा था। यह समारोह न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि भारत-भूटान के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने वाला साबित हुआ। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुष्ठान बौद्ध भिक्षुओं और भक्तों को एकजुट करने वाला वैश्विक आयोजन है।
कालचक्र अभिषेक, जिसे ‘व्हील ऑफ टाइम’ भी कहा जाता है, वज्रयान बौद्ध धर्म की एक प्रमुख तांत्रिक दीक्षा प्रक्रिया है। इसका अर्थ है समय का चक्र यहां तीन चक्करों से मिलके बनता है यहां ध्यान और साधना से दुखों से मुक्ति दिलाने वाली उच्चतम तंत्र विधि है यह यह बुद्ध की शिक्षाओं का एक polysemic रूप है यहां समय को समझने और परिवर्तित करने पर केंद्रित है दलाई लामा कि शिक्षाओं में इसे बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति प्रतीक बताया गया है यहां शांति प्रदान करता है
